न्यूनतम अनादर (दुश्मन/ सूक्ष्म जीवों का भी) करने वाला ही अधिकतम आदर का पात्र होता है।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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2 Responses
आदर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दुश्मन का भी अनादर करना उचित नहीं होता है। अतः जीवन में किसी का भी अनादर करना उचित नहीं होता है।
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आदर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दुश्मन का भी अनादर करना उचित नहीं होता है। अतः जीवन में किसी का भी अनादर करना उचित नहीं होता है।
Wonderful way of expressing the importance of ‘Vinay’ Dharm !