मुनि को आहार को जाते समय यदि कोई भक्ति के अतिरेक/ अज्ञानतावश पैर छू ले तो अपवाद स्वरूप अशुद्धि नहीं मानना।
आगम में कथानक आता है कि जब बच्चे ने खीर खाने/ खिलाने के लिये मुनि के पैर पकड़ लिये थे फिर भी उसके घर आहार हुआ।
मुनि श्री मंगलानन्द जी
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छूने से अशुद्बि को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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