रूपी / मूर्तिक
1. आत्मा –> रुपी संसारी की, रुपी/ अरुपी केवलज्ञानी का विषय। अमूर्तिक(निश्चित आकार नहीं)।
सिद्ध –> अरुपी, अमूर्तिक … केवलज्ञानी का विषय।
2. विषयभोग –> रूपी क्योंकि पौद्गलिक, मूर्तिक भी।
3. काल/ धर्म/ अधर्म –> मूर्तिक क्योंकि आकार निश्चित, अमूर्तिक क्योंकि स्पर्श आदि नहीं।
आकाश –> अमूर्तिक (अनन्त है), अरूपी। केवलज्ञानी को रूपी (दिखने की अपेक्षा)।
पुद्गल –> मूर्तिक, रूपी। सूक्ष्म-पुद्गल प्रत्यक्षज्ञानी का विषय, स्थूल-पुद्गल मति/ श्रुतज्ञानी का विषय।
चिंतन



