समय

स्टेज पर दूसरे कार्यक्रमों की बहुलता तथा धर्मचर्चा के लिए समय बहुत कम रह जाने पर,
आचार्य श्री विद्यासागर जी –> समय की कीमत करो, ये साधु अपना-अपना स्वाध्याय छोड़कर यहाँ धर्मचर्चा करने/ सुनने आये हैं। एक समय में इनकी असंख्यात् गुणी निर्जरा हो सकती थी। एक समय में जीव नरकायु बांधते-बांधते मुक्त हो सकता है।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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One Response

  1. आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने समय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु समय का सदुपयोग करना परम आवश्यक है।

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