(…,ऐसी प्रकृतियों का बंध होता है जो सारे बंधनों को काटने में समर्थ होती हैं।)
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने भक्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु जिनेन्द्र भगवान् की भक्ति करना परम आवश्यक है। भक्ति से सारे बंधनों को काटने में समर्थ होते हैं।
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने भक्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु जिनेन्द्र भगवान् की भक्ति करना परम आवश्यक है। भक्ति से सारे बंधनों को काटने में समर्थ होते हैं।