कर्म-बंध
गाड़ी आगे चले या पीछे ईंधन तो खपेगा ही। सुकर्म करें या दुष्कर्म, कर्म तो बंधेंगे ही। गाड़ी आगे जाने पर गंतव्य पहुँचोगे, पीछे जाने पर गंतव्य से दूर।
आर्यिका श्री स्वस्तिभूषणमति माताजी
गाड़ी आगे चले या पीछे ईंधन तो खपेगा ही। सुकर्म करें या दुष्कर्म, कर्म तो बंधेंगे ही। गाड़ी आगे जाने पर गंतव्य पहुँचोगे, पीछे जाने पर गंतव्य से दूर।
आर्यिका श्री स्वस्तिभूषणमति माताजी
One Response
कर्म -बंध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु सुकर्म यानी अच्छे कर्म करना ही परम आवश्यक है।