श्रावक
आचार्य श्री विद्यासागर जी के दर्शन करने एक धनाड्य व्यक्ति आये।
आचार्य श्री –> सेठ जी आ गये ?
सेठ –> सेठ नहीं महाराज, भक्त।
नहीं, सिर्फ सेठ ही।
समझा नहीं !
क्या आपके घर में शुद्ध भोजन बनता है ? गुरुओं के चरण धोने को शुद्ध प्रासुक जल रहता है?? (या सिर्फ अपार धन ही रहता है)
(राजीव चौधरी – ग्वालियर)




One Response
श्रावक का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु उत्तम श्रावक यानी भोजन में शुद्धता, साधुओं के पाद प्रक्षालन के लिए प़ासूक जल,भेया वृत्ति करना यानी हर कार्य में पवित्रता रखना परम आवश्यक है। श्रावक को गुरुओं के मार्ग दर्शन पर चलना आवश्यक है।