Category: चिंतन
सत्य
सत्य पहले तथा कई बार स्वीकारा जाता है तब एक बार कहा जाता है। इस अपेक्षा से स्वीकार करने में ज्यादा शक्ति लगती है। चिंतन
मनुष्यों के भेद
मनुष्यों की श्रेणियाँ… कंजूस – मेरा 1 रुपया खर्च न हो, दूसरे के चाहे हज़ारों। संतुलित – मैं भी खर्च करूँ, दूसरे को भी करने
शुद्धता
बर्तनों को शुद्ध, राख से करते हैं। आत्मा को गुरु/ भगवान की “चरण-रज” से। भगवान की “चरण-रज” कैसे मिले ? भगवान के गंधोदक से (स्नान
जिंदा
जो दूसरों को जिंदा न रहने दे, उसे जिंदा नहीं कह सकते/ उसे जिंदा रहने का अधिकार नहीं। 2) जो गुरु/ भगवान के सामने अकड़ा
पापात्मा
जो पाप क्रियाओं में आनंद लें और पुण्य क्रियाओं को बोझा मानें, वे पापात्मा। चिंतन
संसार की उपयोगिता
संसार की एक उपयोगिता यह भी है कि यहाँ सुख का Taste/ पहचान हो जाती है (सुखाभास के रूप में)। तभी तो असली/ Permanent/ अनन्त
वैराग्य / विषाद
वैराग्य कारण –> मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? विषाद कारण –> मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है ? चिंतन
पैसा
पैसा जड़ (निर्जीव) है, पर हमारी जड़ें हिला देता है (मनुष्यता को हिला देता है)। चिंतन
परमात्मा
यदि पर की ओर देखना ही है तो “पर की आत्मा” की ओर क्यों न देखें! ताकि आप परमात्मा बन सकें। चिंतन
अबुद्धिपूर्वक
हर क्षेत्र में Best Performance अबुद्धिपूर्वक ही होता है जैसे वाद्य बजाते समय। शांतिपथ प्रदर्शक क्योंकि जब बुद्धि विश्राम करती है तब आत्मा Takeover कर
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