Category: चिंतन
पापात्मा
जो पाप क्रियाओं में आनंद लें और पुण्य क्रियाओं को बोझा मानें, वे पापात्मा। चिंतन
संसार की उपयोगिता
संसार की एक उपयोगिता यह भी है कि यहाँ सुख का Taste/ पहचान हो जाती है (सुखाभास के रूप में)। तभी तो असली/ Permanent/ अनन्त
वैराग्य / विषाद
वैराग्य कारण –> मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? विषाद कारण –> मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है ? चिंतन
पैसा
पैसा जड़ (निर्जीव) है, पर हमारी जड़ें हिला देता है (मनुष्यता को हिला देता है)। चिंतन
परमात्मा
यदि पर की ओर देखना ही है तो “पर की आत्मा” की ओर क्यों न देखें! ताकि आप परमात्मा बन सकें। चिंतन
अबुद्धिपूर्वक
हर क्षेत्र में Best Performance अबुद्धिपूर्वक ही होता है जैसे वाद्य बजाते समय। शांतिपथ प्रदर्शक क्योंकि जब बुद्धि विश्राम करती है तब आत्मा Takeover कर
तप
सोना तप कर शुद्ध, चमकदार ही नहीं अपनी अकड़ छोड़ मुलायम हो जाता है। यदि हम तपने से घबराते हैं तो अपने को सोना नहीं,
कमाई / दान
उच्छवास/ Inhale – श्वास अंदर लेना। प्राण/ अपान/ श्वास/ Exhale – बाहर निकालना। श्वास अंदर लेते हैं तो बाहर भी निकालना ज़रूरी है, अन्यथा प्राण
राग
जानवर राग तथा द्वेष में एक सी भाषा बोलते हैं (जैसे कुत्तों का भौंकना)। मनुष्य राग में तो राग/ मोह करता ही है, द्वेष का
पुरुषार्थ / भाग्य
पुरुषार्थ—> जन्म लिया है तो उड़ना तो होगा ही (वरना हिंसक जीव घात कर देंगे)। भाग्य—> अंत में धरातल पर आना(मरण) भी निश्चित है। चिंतन
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