उत्कृष्टता की तीन श्रेणी* ——> 10, 16, 25% दान देने वाले।
निकृष्टता की भी तीन श्रेणी** –> 90, 84, 75% समय/ ध्यान (भगवान/ गुरु/ शास्त्र को छोड़कर) दूसरों पर लगाने वाले।
चिंतन
* बढ़ते हुए क्रम में।
** घटते हुए क्रम में।
Share this on...
2 Responses
उत्कृष्ट/निकृष्ट को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए उत्कृष्ट बनना परम आवश्यक है। जीवन में निकृष्ट के भाव रखना, जीवन को बर्बाद करना होगा। जीवन में भगवान्, गुरु, एवं शास्त्र पर श्रद्बान रखना परम आवश्यक है।
2 Responses
उत्कृष्ट/निकृष्ट को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए उत्कृष्ट बनना परम आवश्यक है। जीवन में निकृष्ट के भाव रखना, जीवन को बर्बाद करना होगा। जीवन में भगवान्, गुरु, एवं शास्त्र पर श्रद्बान रखना परम आवश्यक है।
Bahut hi innovative aur relevant chintan hai !