गणधर के शिष्य

गणधर के शिष्य “गुणधर” (गुणों के धारक)।
उत्तम – सम्यक् चारित्र के धारक।
मध्यम – सम्यग्दर्शन के धारक।
जघन्य – सिर्फ नाम के धारक जैसे आम जैन।

चिंतन

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4 Responses

  1. गणधर के शिष्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः गणधर के शिष्य के लिए सम्यक् चारित्र होना परम आवश्यक है।

    1. सम्यग्दर्शन के साथ सम्यग्ज्ञान तो हो ही जाता है इसलिए उसकी अलग कैटेगरी बनाने की जरूरत नहीं थी वैसे भी सम्यग्दर्शन ज्यादा आदरणीय है सम्यग्ज्ञान से।

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