Month: September 2026
Happy Life
If you want to live a happy life: tie it to a goal, not to people or things. Albert Einstein (J.L.Jain)
द्विविधानी
तत्त्वार्थ सूत्र में आये इस शब्द(द्विविधानी) के कई अर्थ लिये जा सकते हैं- द्रव्येद्रिन्य तथा भावेन्द्रिय बाह्य इन्द्रिय तथा अंतरंग कामेन्द्रिय (स्पर्श व रसना) तथा
रात्रि भोजन
रात्रि भोजन में आलू से भी ज्यादा दोष है। कैसे ? आलू में एकेन्द्रिय जीव होते हैं, रात्रि में त्रस जीव भी गिरते हैं/ खाने
कल
सकल-अरहंत में शरीर के सहित । कल यानी पिछला या अगला दिन। जो भी इनके चक्कर में पड़ा शरीर की तरह दुखी हुआ। इसलिए कहते
मुनि
मुनि को हाथी की संज्ञा दी जा सकती है। हाथी को महावत नियंत्रित करता है, मुनि को महाव्रत। नियंत्रित करने वाला अंकुश यदि गिर जाता
सबक
किसी को सबक सिखाने की ज़िद न करें, क्योंकि सबक सिखाए नहीं जाते, सीखे जाते हैं। (सुरेश जैन – इंदौर)
कुत्ते कारों में
कुत्तों को ऐशो-आराम के साथ देखा जाता है, यह स्थिति कैसे ? पिछले जन्म में खूब धर्म किया सो ऐशो-आराम मिला। साथ-साथ मायाचारी की सो
Life
Life is funny: you come with nothing, then you fight for everything, and then go with nothing. (J.L.Jain)
अपरिग्रह
तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 7 सूत्र 29 में परिग्रह की सीमा में नौ श्रेणियाँ लीं हैं। कुप्य (वस्त्र) लिया है, भांड (बर्तन) नहीं लिया। आचार्य श्री विद्यासागर
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