चोरी का माल
चोर घोड़ा चुरा कर बेचने खड़ा हुआ। कीमत तो मालूम नहीं थी सो बहुत ज्यादा बता रहा था। ग्राहक लौट रहे थे। एक ने कहा ठीक है जरा चाल तो देख लूँ। हाथ का हुक्का चोर को पकड़ा कर घोड़े पर चढ़ा और भाग गया।
पहला खरीददार आया → बिक गया ? कितने में ??
जितने में लिया था, उतने में।
बचत क्या हुई ?
ये पाप का हुक्का।
क्षु. सहजानन्द जी




One Response
चोरी का माल का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए चोरी का माल को बेचना एवं खरीदना दोनो पाप की श्रेणी में आतीं है। अतः जीवन में महाचारी से बचना परम आवश्यक है।