ज्ञान दो साधनों से –>
1. वस्तु(अजीव) जगत से… इसमें स्थायीपना होता है सो प्रामाणिक है जैसे आग जलाती है। आजकल इसका आदर बहुत बढ़ गया है।
2. जीव जगत से…इसमें स्थिरता नहीं। आदर घट गया है।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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ज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ज्ञान वही सार्थक है, जो जीवन को पवित्र बना सकें एवं आत्म कल्याण होना परम आवश्यक है।
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ज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ज्ञान वही सार्थक है, जो जीवन को पवित्र बना सकें एवं आत्म कल्याण होना परम आवश्यक है।