दान
जैसलमेर में अकाल पड़ा। सेठ जयचंद्र जैन ने हजारों क्विंटल अनाज, घी, तेल, धनादि राजा मानसिंह के कोष में दान दिया। अकाल समाप्त होने पर सेठ जी को पता लगा कि मंदिर पुजारी के २ पुत्र, सेठ के मित्र का पुत्र, भूख से मर गये।
सेठ ने राजा से शिकायत की –> मेरे आसपास तक सहायता नहीं पहुँची।
राजा –> पहले आपको अपने आसपास/ नौकर आदि का ध्यान रखना था।
क्या हम रखते हैं ?
(अनिता जी – शिवपुरी)




One Response
दान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। दान जब गरीबी को मदद करने का होता है तो सभी जरुरत लोगों का ध्यान रखना परम आवश्यक है। राजा हो या सेठ सभी को अपने कर्तव्य का ध्यान रखना परम आवश्यक है। उपरोक्त प़करण में राजा को अधिक दोष देना चाहिए था।