दु:ख
दु:ख हमारे जीवन में पाप से आते हैं। परिग्रह एक पाप है यानी हमारे जीवन में दुःख परिग्रह से आ रहे हैं। फिर वह परिग्रह चाहे टेंशन से आए या पेंशन से।
विडंबना… हम पूरे उत्साह/ पुरुषार्थ के साथ अपने जीवन में परिग्रह जमा करते हैं, दुःख के इस निमित्त को सुखों का कारण मानते हैं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 4 अक्टूबर)




One Response
दुख का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दुख से बचने के लिए परिग्रह का त्याग करना परम आवश्यक है।