धर्म
धर्म जीने की कला सिखाता है, साथ साथ मरने का सलीका भी।
जैसे एक ही थाली से खाया भी जाता है, त्याग भी।
आर्यिका अर्हम् श्री माताजी
धर्म जीने की कला सिखाता है, साथ साथ मरने का सलीका भी।
जैसे एक ही थाली से खाया भी जाता है, त्याग भी।
आर्यिका अर्हम् श्री माताजी
4 Responses
धर्म की बहुत सुन्दर परिभाषा का विवरण किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए धर्म का आश्रय लेना परम आवश्यक है।
‘जैसे एक ही थाली से खाया भी जाता है, त्याग भी।’ Is sentence ka meaning clarify karenge,
please ?
जैसे थाली से ही खाते हैं और थाली में से ही मुनिराज त्याग करते हैं, चीज निकलवाते हैं। ऐसे ही धर्म हमें जीना भी सीखना है और मरना भी।
Okay.