प्राय: व्यक्ति अपने से छोटे, बड़े तथा खराब सभी को नियंत्रित करना चाहता है लेकिन अपने को नहीं।
किसी को सुधारना है तो पहले अपने को सुधारना होगा उसके बाद खराब वालों को युक्ति से, कमजोरों को शक्ति से और बलवान को भक्ति से सुधारा जा सकता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 18 जून)
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2 Responses
नियंत्रण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए स्वयं को सुधारकर एवं नियंत्रण रखना परम आवश्यक है, ताकि अन्य को सुधारने का प़यास कर सकते हो।
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नियंत्रण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए स्वयं को सुधारकर एवं नियंत्रण रखना परम आवश्यक है, ताकि अन्य को सुधारने का प़यास कर सकते हो।
Beautiful post that is useful in our day to day life ! Namostu Gurudev !