पद / प्रतिभा

पद मिले, प्रतिभा न रहे तो धृतराष्ट्र बनते हैं।
प्रतिभा रहे, पद न मिले तो कर्ण।

(सुरेश – इंदौर)

Share this on...

4 Responses

  1. पद एवं प़तिभा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए प़तिभा परम आवश्यक है। लेकिन पद एवं प़तिभा का लालच नही रहना चाहिए।

  2. पद एवं प़तिभा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए प़तिभा की परम आवश्यकता है। लेकिन कभी कभी भी पद का अभिमान करना उचित नहीं है।

  3. पद एवं प़तिभा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए भेदविज्ञान पर विश्वास एवं श्रद्बान करना परम आवश्यक है।

  4. पद एवं प़तिभा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के लिए प़तिभा होना परम आवश्यक है, लेकिन पद की आंकाक्षा करना उचित नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives
Recent Comments

November 26, 2025

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031