विकथा
विकथा 4 नहीं, 15 होती हैं….
स्त्री, धन, भोजन, नदी पर्वत से घिरे स्थान/ केवल पर्वतों से घिरे स्थान, राज, चोर, देश-नगर, खान, नट, भाट, मल्ल, कपट, व्याध, जुआरी, हिंसकों की कथायें।
आत्मप्रशंसा/ परनिंदा, जिससे प्रयोजन सिद्ध न हो, हार-जीत जहाँ अपना कुछ लेना-देना न हो।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – अध्याय 8/7)



