विकथा
विकथा 4 नहीं, 15 होती हैं….
स्त्री, धन, भोजन, नदी पर्वत से घिरे स्थान/ केवल पर्वतों से घिरे स्थान, राज, चोर, देश-नगर, खान, नट, भाट, मल्ल, कपट, व्याध, जुआरी, हिंसकों की कथायें।
आत्मप्रशंसा/ परनिंदा, जिससे प्रयोजन सिद्ध न हो, हार-जीत जहाँ अपना कुछ लेना-देना न हो।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – अध्याय 8/7)




3 Responses
विकथा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु आत्मप्रशंसा एवं परनिंदा से बचने का प्रयास करना परम आवश्यक है।
Counting to 15 se exceed ho rahi hai ! Ise clarify karenge, please ?
ऊपर तो 15 श्रेणियां ही हैं, आत्मप्रशंसा आदि ऊपर की श्रेणियों में भी आ सकती हैं, उसकी परिभाषा दी है, इसलिए मैंने पैर बना दिया