समवसरण में केवलज्ञान उत्पन्न हो सकता है। भरत चक्रवर्ती के सेनापति जयकुमार भगवान आदिनाथ के 71वें गणधर थे। उनको मोक्ष आदिनाथ भगवान से पहले हुआ था। गणधर समवसरण छोड़ते नहीं है। इससे सिद्ध होता है कि समवसरण में केवलज्ञान हो सकता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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समवसरण में केवलज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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समवसरण में केवलज्ञान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।