सुख को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए श्रावक को सद्गंहस्थ एवं श्रमण को साधु बनकर रहना परम आवश्यक है। Reply
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सुख को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए श्रावक को सद्गंहस्थ एवं श्रमण को साधु बनकर रहना परम आवश्यक है।