सुख
- संसारी सुख…
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- हर सुख के पीछे दु:ख जैसे भोजन बनाने में दु:ख, उसे सुख की आशा कि परिवारजन खुश होंगे।
- दु:ख का प्रतिकार ही सुख है जैसे रोग दूर करने के लिए औषधि।
- इच्छा की पूर्ति पूरी न होने पर दु:ख, पूरी/ अधूरी पूर्ण होने का सुख।
छोटी-छोटी इच्छा पूर्ति होने की संभावना ज्यादा, पूरी न होने पर निराशा भी कम।
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- सच्चा/शाश्वत सुख …आत्मिक/ भगवान का।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी




One Response
संसारी सुख का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। उपरोक्त कथन सत्य है कि संसारिक सुख के लिए दुखों का प़तिकार करना परम आवश्यक है। लेकिन जीवन में सच्चा सुख आत्मिक सुख होना परम आवश्यक है।