स्थिति
परिस्थिति जो “पर” में स्थित हो। यह आपके हाथ नहीं।
लेकिन पूरा पुरुषार्थ करने तथा आशावान रहने से स्व-स्थिति बदल जाती है। तब परिस्थिति भी स्व-स्थिति बनने लगती है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका समाधान – 27.9.23 )
परिस्थिति जो “पर” में स्थित हो। यह आपके हाथ नहीं।
लेकिन पूरा पुरुषार्थ करने तथा आशावान रहने से स्व-स्थिति बदल जाती है। तब परिस्थिति भी स्व-स्थिति बनने लगती है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका समाधान – 27.9.23 )
2 Responses
स्थिति का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए पर स्थिति पर निर्भर नहीं होकर स्वयं की स्थिति पुरुषार्थ करके बदलने का प़यास करना परम आवश्यक है।
Bahut hi sundar aur relatable post hai ! Namostu Gurudev !