आत्मा का कोई वर्ण नहीं होता।
कथंचित् कारण –> आत्मा में लेश्या नहीं होती (वर्ण/ लेश्या, कर्म वर्गणाओं से ही होती है)।
लेश्या नहीं, तो वर्ण नहीं, आत्मा वर्णहीन हुई।
चिंतन
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आत्मा के वर्ण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः आत्मा में लेशायों/ कर्म के कारण ही प़भाव रहता है।
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आत्मा के वर्ण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः आत्मा में लेशायों/ कर्म के कारण ही प़भाव रहता है।