इष्ट / अनिष्ट
इष्ट/अनिष्ट स्थायी नहीं रहते।
माँ बचपन में इष्ट, शादी के बाद पत्नी फिर बच्चे, वृद्धावस्था में भगवान।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
इष्ट/अनिष्ट स्थायी नहीं रहते।
माँ बचपन में इष्ट, शादी के बाद पत्नी फिर बच्चे, वृद्धावस्था में भगवान।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
One Response
इष्ट/अनिष्ट का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अनिष्ट से बचने हेतु प्रारम्भ से ही धर्म का आश्रय लेना परम आवश्यक है।