उदारता
तीन मित्र रोजाना साथ-साथ जाते थे। एक दिन एक मित्र पैसे देता था दूसरे/ तीसरे दिन दूसरे। पहला मित्र कम से कम पैसे देने की कोशिश करता था, दूसरा नॉर्मल और तीसरा दया करके उसको ऊपर से टिप भी देता था।
पहले दो न उदार हैं ना ही उनका उद्धार होगा, तीसरे का होगा। ऊपर से जब भी वह रिक्शावाला मिलता था तो मुस्करा के नमस्कार भी करता था।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 27 फ़रवरी)




One Response
उदारता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए उदारता होना परम आवश्यक है।