जिन मुनिराजों के मनोगुप्ति होती है उनका मन समाप्त तो नहीं हुआ ना, भगवान की तरह और जब तक समाप्त नहीं हुआ तो गुप्ति का मतलब मन को नकारात्मक नहीं रखना। Reply
Upar diya hua explanation clear hai. Magar aisi ‘मनोगुप्ति’, ‘प्रवृत्यात्मक’ hogi ya ‘निवृत्यात्मक’ ? Ise clarify karenge, please ? Reply
5 Responses
गुप्ति को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
Kya ‘आर्तध्यान में नहीं लगना’, ‘निवृत्यात्मक’ me aayega ? Ise clarify karenge, please ?
जिन मुनिराजों के मनोगुप्ति होती है उनका मन समाप्त तो नहीं हुआ ना, भगवान की तरह और जब तक समाप्त नहीं हुआ तो गुप्ति का मतलब मन को नकारात्मक नहीं रखना।
Upar diya hua explanation clear hai. Magar aisi ‘मनोगुप्ति’, ‘प्रवृत्यात्मक’ hogi ya ‘निवृत्यात्मक’ ? Ise clarify karenge, please ?
परिभाषा में आ गया… “नहीं करना”, तो जहाँ “नहीं” शब्द आ गया, वहाँ पर निवृत्यात्मक।