ज्ञानी
आँख वस्तु को बिना छुए ज्ञान प्राप्त करती है। ज्ञानी भी जानता/ देखता है, चीज़ों में involve नहीं होता।
वृद्धावस्था में इन्द्रियाँ जवाब दे देती हैं। बस आँख की तरह दूर से समझो/ अंदर में रहो। सुखी रहोगे, क्योंकि सुख तो अंदर ही है।
आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी




One Response
ज्ञानी का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। ज्ञान को प्राप्त करने के लिए गुरुजनों एवं स्वाध्याय से मिल सकता है। ज्ञानी आत्मा को ही जानता है, इसलिए भेद विज्ञान एवं कर्म सिद्धान्त पर विश्वास रखता है। जीवन में समभाव की भावना रहती है। जीवन में दुःख, सुख हो उसमें समता का भाव रहता है।