अज्ञानी बच्चे हाथी के आगे-आगे चलते हैं (हाथी जो ज्ञान का प्रतीक है और अज्ञानी बच्चे मान के)। वही बच्चे पागल के पीछे-पीछे ताकि उसे पत्थर मार सकें।
इसीलिए आचार्य भगवन कहते हैं… ज्ञान वही जो गर्व रहित हो।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (आचार्य श्री अमोघवर्ष – गाथा 27 – 14 मई)
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ज्ञान को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ज्ञान पर अभिमान करना उचित नहीं है।
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