दर्शन-प्रतिमा में देवदर्शन से ज्यादा महत्वपूर्ण है शुद्ध/ सात्विक भोजन।
देवदर्शन न मिलने पर एक स्थान पर बैठकर भगवान का चिंतवन करने से नियम पूरा हो जाएगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
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दर्शन -प़तिमा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः दर्शन के लिए जीवन में सात्विकता एवं विशुद्ध भाव रखना परम आवश्यक है।
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दर्शन -प़तिमा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः दर्शन के लिए जीवन में सात्विकता एवं विशुद्ध भाव रखना परम आवश्यक है।