दान
दान अपने से बड़ों को….
- जिससे उनकी पूज्यता बढ़े।
- ख़ुद पूज्य बनने को।
पुण्यहीनों को सहयोग।
व्यवहार में तो दान शब्द बहुत जगहों पर प्रयोग कर लेते हैं जैसे पानदान आदि में।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
दान अपने से बड़ों को….
पुण्यहीनों को सहयोग।
व्यवहार में तो दान शब्द बहुत जगहों पर प्रयोग कर लेते हैं जैसे पानदान आदि में।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
One Response
दान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।जैन धर्म में दान से पुण्य की प्राप्ति होती है।दान पारमार्थिक क्षेत्र में मन्दिर निर्माण, भगवान् विराजमान करना, आहार दान,भैयावृती करना उपकरण दान आदि आवश्यक रहते हैं।पुणहीन लोगों को भी कर सकते हैं। इसमें अभिमान से वचना परम आवश्यक है।