सिद्धांत ग्रंथों में दिव्यध्वनि को भी संशयी कह दिया। पर दिव्यध्वनि तो संशयी हो ही नहीं सकती। पात्र संशयी होते हैं और जब दिव्यध्वनि उस पात्र में जाती है तो वह संशयी कही जा सकती है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 28 अप्रैल)
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दिव्यधुनी को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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दिव्यधुनी को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।