धर्म ध्यान
गुरुजन कहते हैं → धर्म ध्यान हर समय करते रहना चाहिए। पर हर समय पूजादि तो सम्भव नहीं !
पूजादि तो धर्म के बाह्य रूप हैं, असली तो अंतरंग है और वह सम्भव होता समता-भाव से।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
गुरुजन कहते हैं → धर्म ध्यान हर समय करते रहना चाहिए। पर हर समय पूजादि तो सम्भव नहीं !
पूजादि तो धर्म के बाह्य रूप हैं, असली तो अंतरंग है और वह सम्भव होता समता-भाव से।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
2 Responses
धर्म ध्यान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।धर्म ध्यान अंतरंग में रखना, इसके लिए जीवन में समता का भाव रखना परम आवश्यक है।
Dharm karne ka bahut hi practical sutra hai !