हम नाक(नासा) के चक्कर में रहते हैं, इसलिये गिरते हैं।
भगवान नासा-दृष्टि रखते हैं, सो उभरते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने नाक का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में अपनी नाक यानी अपनी इच्छाओं की पूर्ती करने के चक्कर में रहना उचित नहीं है बल्कि भगवान् की शरण में रहना परम आवश्यक है।
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने नाक का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में अपनी नाक यानी अपनी इच्छाओं की पूर्ती करने के चक्कर में रहना उचित नहीं है बल्कि भगवान् की शरण में रहना परम आवश्यक है।