निराकुलता

अतिभाव तथा अतिअभाव दोनों ही आकुलता देते हैं।*
समभाव से ही निराकुलता आती है।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

*(अति-निर्देश भी)।

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4 Responses

  1. निराकुलता को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए निराकुलता रहना परम आवश्यक है, इसके लिए समभाव में रहना परम आवश्यक है।

    1. जो लोग बहुत इंस्ट्रक्शन देते हैं, ज्यादा डिटेल में, सामने वाले को बहुत आकुलता होती है और देने वाले को भी होती है कि मैं इतनी बातें बता रहा हूँ , इसके चेहरे पर रिएक्शन ही नहीं आ रहा है।
      बड़ौदा में मैं पोस्टेड था तो मेरे जो बॉस थे गोस्वामी, बहुत डिटेल में इंस्ट्रक्शन देते थे। बाद में कहते थे… मैं आपको समझाता हूँ। मैंने पढ़ाने के लिए अप्लाई किया। मुझसे बोले पता नहीं तुम कैसे पढाओगे, मैं तो सुबह से शाम तक समझाता हूँ , मुझे खुद नहीं समझ में नहीं आता है कि मैंने क्या समझाया।

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