मधुरता / उदारता
समुद्र नहीं तालाब बनो जहाँ शेर भी सिर झुका कर पानी पीने को मजबूर हो जाते हैं।
हम ऐसे तालाब कैसे बनें ?
जीवन में मधुरता/ उदारता लाने पर।
लाभ क्या होगा ?
तब कर्म भी सिर झुका जाएँगे।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
समुद्र नहीं तालाब बनो जहाँ शेर भी सिर झुका कर पानी पीने को मजबूर हो जाते हैं।
हम ऐसे तालाब कैसे बनें ?
जीवन में मधुरता/ उदारता लाने पर।
लाभ क्या होगा ?
तब कर्म भी सिर झुका जाएँगे।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
2 Responses
मधुरता/उदारता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु मधुरता एवं उदारता के भाव रखना परम आवश्यक है।
Is post ko jeevan me utarna chahiye! Namostu Gurudev !