मधुरता / उदारता
समुद्र नहीं तालाब बनो जहाँ शेर भी सिर झुका कर पानी पीने को मजबूर हो जाते हैं।
हम ऐसे तालाब कैसे बनें ?
जीवन में मधुरता/ उदारता लाने पर।
लाभ क्या होगा ?
तब कर्म भी सिर झुका जायेंगे।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
समुद्र नहीं तालाब बनो जहाँ शेर भी सिर झुका कर पानी पीने को मजबूर हो जाते हैं।
हम ऐसे तालाब कैसे बनें ?
जीवन में मधुरता/ उदारता लाने पर।
लाभ क्या होगा ?
तब कर्म भी सिर झुका जायेंगे।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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