संसार की सबसे कम मूल्यवान वस्तु क्या ?
“मैं स्वयं”
कैसे ?
अपने को दीनहीन दिखाते नहीं, पर मानते हैं।
छोटे-छोटे मूल्य की वस्तुओं जैसे धनादि को मूल्यवान मानना ही दर्शाता है कि हम अपने नहीं हैं क्योंकि अपने को महत्व नहीं देते, चश्मे से ज्यादा महत्वपूर्ण है आँख।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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मूल्य का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सबसे मूल्यमान अपनी आत्मा को जानना परम आवश्यक है।
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मूल्य का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सबसे मूल्यमान अपनी आत्मा को जानना परम आवश्यक है।