वैमानिक देव
सम्यग्दर्शन की अपेक्षा से नहीं किंतु शुभ लेश्या के कारण वे विमानवासी देव माने जाते हैं। मान सम्मान के साथ वहाँ पर रहते हैं इसीलिए उनको वैमानिक संज्ञा दी गई है।
(सूत्रोपदेश) आचार्य श्री विद्यासागर जी
वैमानिक देवों को विमानों में रहने की अपेक्षा से वैमानिक नहीं कहते; विशेष प्रतिष्ठा/ पुण्य के कारण वैमानिक कहते हैं। विमानों में तो ज्योतिष्क देव भी रहते हैं।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका-समाधान : 44)




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मुनि श्री प़णम्यसागर महाराज जी ने वैमानिक देव को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।