व्यसन (चोरी भी व्यसन है, हालांकि इसे पांच पापों में गिना जाता है) त्याग में दक्ष कौन ?
सर्वथा त्यागी, यानी मुमुक्षु (मोक्ष सिर्फ चाहता नहीं, उसके लिए हमेशा त्याग करता/ त्याग करने के लिए तैयार रहता) जैसे मुनिराज।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन- 2 मई)
Share this on...
One Response
व्यसन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गलत व्यसनों से बचकर रहना परम आवश्यक है।
One Response
व्यसन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गलत व्यसनों से बचकर रहना परम आवश्यक है।