जब तक सर्प पिटारे के अंदर रहता है उसकी पूजा होती है, बाहर आने पर पिटायी।
मनुष्य जब तक अपने में रहता है, लोगों का सम्मान पाता है। दूसरों के कामों में टांग अड़ाता है/ उनकी आलोचना करता है तब ख़ुद आलोचना का पात्र/ अपमानित होता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 2 अक्टूबर)
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अंतरंग का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अंतरंग में रहना परम आवश्यक है।
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अंतरंग का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अंतरंग में रहना परम आवश्यक है।