अवज्ञा
बच्चे हों या ग्राहक, आपकी बात न सुनने, न मानने और अपनी ही तानने का क्या कारण है ?
1) अभक्ष्य भक्षण
2) अपशब्दों का प्रयोग
3) दूसरों की निंदा*
4) अपनी प्रशंसा**
* यदि आचरणवान गुरुओं की या आयतनों की जाए तो नरक का कारण।
** मान कषाय को पुष्टि, नीच-गोत्र का बंध तथा समाज में हँसी के पात्र।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 27 जून)




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अवज्ञा को विस्तृत परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अवज्ञा से बचने का प़यास करना परम आवश्यक है।