आचरण
पहाड़ चढ़ते समय जितने-जितने चोटी के करीब आएंगे उतना-उतना स्पेस कम होता जाएगा/ भावनाएं बढ़ती जाएंगी। चोटी पर बने रहने के लिए संतुलन की बहुत आवश्यकता होती है।
श्रद्धा, ज्ञान और आचरण, इनकी तिपाई से स्थिरता आती है जैसे तस्वीर में प्राय: लंबाई चौड़ाई होती है। यदि उसमें गहराई आजाए तो 3D पिक्चर बन जाती है। तीसरा चरण यानी आचरण का महत्व बहुत ज्यादा है। वही उसे वास्तविकता के करीब पहुंचाता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 11 मई)




One Response
आचरण का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आचरण होना परम आवश्यक है।