आस्था
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे.. किसी की आस्था पर चोट करना भी चोरी है।
यह मिथ्यात्व है/ गलत है, ऐसा बार-बार कहने से आपकी जुबान हल्की होती है, उसका प्रभाव कम होता चला जाता है।
यह बताओ कि सच क्या है/ सम्यक् क्या है, प्रभाव बढ़ता जाएगा। क्षीरसागर के पानी की अहमियत बताने पर कौन गंदा/ खारा पानी पिएगा ! बिना बताए छुड़ा दोगे तो प्यासा मर जाएगा।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 6 जुलाई)




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आस्था का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः किसी की आस्था पर चोट करना उचित नहीं है। जिसकी जो आस्था है, उस पर विश्वास करना परम आवश्यक है।