उपयोग / लब्धि

उपयोग में एक समय में एक ही ज्ञान होता है। अन्य ज्ञान कर्मों के क्षयोपशम से लब्धि रूप रहते हैं।
केवलज्ञान हमेशा उपयोग रूप ही होता है, लब्धि कुछ नहीं।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 30/1)

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4 Responses

  1. उपयोग /लब्धि को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।

    1. उपयोग में एक समय में एक ही ज्ञान रहता है इसमें तो कोई शंका नहीं ! बाकी ज्ञान कैपेबिलिटी/ कैपेसिटी के रूप में उनके लब्धि रूप अंदर रहते हैं। केवलज्ञान तो एक ही ज्ञान है बाकी सब ज्ञान होते ही नहीं, लब्धि का प्रश्न नहीं रहता।

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