जैसे घी किसी से न राग करता ना द्वेष, ऊपर तैरता रहता। ऐसे ही वहाँ का जल राग द्वेष रहित कह सकते हैं। आगे के गन्ने के रस जैसा पानी। Reply
4 Responses
करुणानुयोग को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
Can meaning of this post be explained a little more in detail, please ?
जैसे घी किसी से न राग करता ना द्वेष, ऊपर तैरता रहता। ऐसे ही वहाँ का जल राग द्वेष रहित कह सकते हैं। आगे के गन्ने के रस जैसा पानी।
Okay.