धन का संबंध तो हमेशा परेशानी के साथ ही रहता है।
कम हो तो दिन में परेशानी, ज्यादा हो तो रात में।
(एन. सी. जैन – नोयडा)
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5 Responses
धन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए धन की आवश्यकता अनुसार कमाना परम आवश्यक है। लेकिन धन के प़ति आशाक्ती रखना पाप की श्रेणी में आता है। धन अधिक अर्जित हुआ है उसको उदारता पूर्वक दान देना परम आवश्यक है।
Ankush ne point out kiya ki dhan zyaada ho to din aur raat dono me pareshani hoti hai, as us dhan ko ekatrit/maintain karne ke liye din me bhi bhag-daud karni padti hai .
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धन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए धन की आवश्यकता अनुसार कमाना परम आवश्यक है। लेकिन धन के प़ति आशाक्ती रखना पाप की श्रेणी में आता है। धन अधिक अर्जित हुआ है उसको उदारता पूर्वक दान देना परम आवश्यक है।
Wonderful post !
Ankush ne point out kiya ki dhan zyaada ho to din aur raat dono me pareshani hoti hai, as us dhan ko ekatrit/maintain karne ke liye din me bhi bhag-daud karni padti hai .
सही।
Okay.