भक्त से भगवान
भक्त से भगवान…
भगवान के सामने बोलो/ अनुभव करो… “दासोहम्”।
अगले कदम पर “उदासोहम्” (संसार से)।
अंत में… “सोहम्”।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
भक्त से भगवान…
भगवान के सामने बोलो/ अनुभव करो… “दासोहम्”।
अगले कदम पर “उदासोहम्” (संसार से)।
अंत में… “सोहम्”।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
2 Responses
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने भक्त से भगवान् को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः भक्त को जब आत्मा का अनुभव करता है,तभी भगवान् बनने का प़यास किया जा सकता है। अतः जीवन के कल्याण हेतु आत्मा यानी सोहम का अनुभव करता परम आवश्यक है।
Bahut hi wonderful post hai ! Acharya Shri ke charno me shat shat naman !